विदेश नीति भाग - 1
भारत की बदलती विदेश नीति---
15 अगस्त 1947 को भारत सदियों पुरानी गुलामी की बेड़ियों से स्वतन्त्र हुआ , और 26 जनवरी 1950 को इस देश यहाँ के नागरिकों द्वारा निर्मित संविधान लागू हुआ , भारत अब अपने वाह एवं आंतरिक निर्णयों को लेने में पूरी तरह से स्वतंत्रता इस देश का अपना संविधान लागू हो चुका था भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने सर्वप्रथम भारत की विदेश नीति का खाका तैयार किया भारत की विदेश नीति का मूल बिंदु स्वच्छता सहिष्णुता आपसी संबंध पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध तत्कालीन विश्व में विद्यमान दो महाशक्तियां अमेरिका व रूस इनमे से किसी का पक्ष लेते हुए निर्गुट रहना स्वीकार किया भारत की विदेश नीति सामंजस्य और शांति आधारित है भारत में प्रथम आक्रमण के सिद्धांत को पूरी तरह से नकार दिया भारत अपने को एक शांतिप्रिय देश के रूप में स्थापित किया हालांकि भारत के लिए इसका बुरा परिणाम हुआ जब कश्मीर के मुद्दे पर राजा हरि सिंह ने कश्मीर को भारत में विलय करने पर सहमति जताई तथा पड़ोसी पाकिस्तान ने कबायली समर्थित सेना के साथ कश्मीर पर आक्रमण कर लिया तथा पाक अधिकृत कश्मीर का निर्माण हुआ यह समस्या आज भी भारत के लिए गले की फांस है इस नीति का एक और बुरा असर भारत-चीन युद्ध रहा जिसमें चीन ने धोखा करके भारत पर आक्रमण किया भारत स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक मात्र पराजय की कालिख भारत-चीन युद्ध हालांकि यस युद्ध में चीन को सफल भी नहीं कहा जा सकता स्वतंत्र भारत में पाकिस्तान के साथ की लड़ाइयां लड़ी उन सभी युद्ध होने पाकिस्तान को पराजय का मुंह देखना पड़ा हलाकि सभी युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान की तरफ से भारत की विदेश नीति के निर्माण में यह सभी तथ्य अपना महत्वपूर्ण स्थान रहते हैं भारत की विदेश नीति पर सर्वप्रथम प्रभाव पंडित जवाहरलाल नेहरु के सिद्धांतों का फिर लाल बहादुर शास्त्री का इंदिरा गांधी के काल में भारत की विदेश नीति थोड़ी उग्र जरूर हुई लेकिन अपने पुराने ढांचे में कोई खास बदलाव नहीं किया भारत की विदेश नीति पर एक और प्रभाव अगर देखा जाए तो प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव का पड़ता है भारत की विदेश नीति में सर्वाधिक परिवर्तन नेहरू काल के बाद राज्य गठबंधन की सरकार बनती है और प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी वाजपेई होते हैं तब भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलता है भारत की स्थिति जो तृतीय श्रेणी के देशो में थी उसमें सुधार होता है तथा भारत तेजी के साथ आगे बढ़ कर प्रथम श्रेणी के करीब पहुंच जाता है इस काल में अमेरिका और रूस इन दो देशों के साथ भारत के संबंध उन्नति साथ ही साथ इजराइल ईरान संयुक्त अरब अमीरात सऊदी अरब अन्य मध्य एशियाई देशों के साथ के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आई अटल बिहारी के काल में भारत ने लुक ईस्ट- पूर्व की ओर देखो नीति का निर्माण किया जो भारत की विदेश नीति में परिवर्तन का वाहक बनी हलाकि 1999 में कारगिल युद्ध पाकिस्तान के साथ भारत को झेलना पड़ा जिसमें भारत बिजी रहा विजय रहा तथा वैश्विक मोर्चे पर भारत ने पाकिस्तान की करारी शिकस्त हुई अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के बाद पुनः केंद्र की सत्ता में कांग्रेस की वापसी होती है तथा मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनते हैं डॉक्टर सिंह के प्रधानमंत्री रहते हैं भारत की विदेश नीति कोई विशेष उन्नति नहीं कर सके एक बार फिर से विदेश नीति अपने पुराने ढर्रे पर पहुंच गई वैश्विक मंचों पर कई बार भारत को दूसरे दर्जे का एहसास हुआ तथा भारत के साथ तमाम मुद्दों पर बहुत कम देश खड़े होते दिखाइए दिए तत्पश्चात 2014 में फिर से भाजपा के नेतृत्व में राज्य गठबंधन की सरकार बनती है जिसमें नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री तथा सुषमा स्वराज विदेश मंत्री का पद संभालती है अब भारत की विदेश नीति में तेजी के साथ परिवर्तन आता है भारत चाहे विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को निकालना हो आतंक के मुद्दे पर अपने पक्ष को रखना हो वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना हो या फिर वैश्विक खेमेबंदी हो इन सब में सफल रहा इतना ही नहीं पड़ोसी देशों के साथ बढ़ रही कड़वाहट भी कम हुई केवल पाकिस्तान और चीन को छोड़कर भारत पूर्वी एशिया के देश के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया तथा अन्य निकटवर्ती देश के साथ भी अमेरिका रूस जापान सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात इजराइल इराक ब्राजील दक्षिण अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया कनाडा ब्रिटेन जर्मनी फ्रांस ऐसे देश जो कहीं ना कहीं एक दूसरे को चुनौती देते रहते हैं लेकिन भारत पिछले 3 वर्षों इन सबके साथ अपने संबंधों को मजबूती प्रदान करने तथा अपने पक्ष में खड़ा करने में सफल रहा है।
वर्तमान विदेश नीति
भारत की वर्तमान विदेश नीति के संबंध में अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भारत और अमेरिकी संबंधों के संबंध में एक नए सिद्धांत को मान्यता दी है उन्होंने जिस तरह से भारत और अमेरिका के संबंधित तेजी से आगे बढ़े पिछले 3 वर्षों में उसे मोदी ओबामा सिद्धांत का नाम दिया उनका मानना है शीत युद्ध के समय से अमेरिका पूंजीवादी दृष्टिकोण का था और विश्व का एक ग्रुप था दूसरा ध्रुव रूस था जो साम्यवादी दृष्टिकोण का था अमेरिका विशेषज्ञ का मानना है भारत जब स्वतंत्र हुआ तो संपूर्ण विश्व में दो गुटों में बटा हुआ था लेकिन भारत में बिना किसी किसी ग्रुप में शामिल हुए निर्गुट आंदोलन को वरीयता दी भारत का झुकाव उसी समय से रूस की तरफ था भारत और रूस में रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक बहुत सारी समझौते किए हैं वही अमेरिका पाकिस्तान को वरीयता देता आया था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत के नीति में परिवर्तन हुआ तथा अमेरिका की नीति में भी परिवर्तन देखा गया अब अमेरिका पाकिस्तान उस को अपना समर्थन देकर भारत के साथ खड़ा दिखाई देता है विश्व मंच पर इस बड़े परिवर्तन को लोग मोदी ओबामा सिद्धांत के ऊपर की सिद्धांत की ऊपज मान रहे हैं लोगों के मन में एक शंका दीजिए विश्व के तमाम राजनीति के विद्वान का मानना है भारत अगर अमेरिका के करीब जाएगा तोरु से दूर हटता जाएगा जो भारत का एक प्रमुख सहयोगी है लेकिन इस संबंध में विश्व के तमाम राजनीति शास्त्रियों के विचार धरे के धरे रह गए भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया विश्व पटल पर एक प्रमुख देश के रूप में उभरा तो वह उसके साथ भी अपने संबंधों को लगातार आगे बढ़ाया अगर देखा जाए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों को हटा दिया जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी बार अमेरिका गए हैं उतनी ही बार रूस भी यात्रा की है प्रधानमंत्री श्री मोदी और वर्तमान विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज इन दोनों ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी विदेश नीति का निर्माण नई दिल्ली में बैठकर संसद भवन या फिर किसी वातानुकूलित कक्ष में नहीं किया जा सकता है इसके लिए विश्व के तमाम देशों के विचार तमाम घटनाएं विश्व से संबंधित समस्त मुद्दे वैश्विक पटल पर जो भी घटनाक्रम घट रहा है उस पर धैर्य के साथ विचार करने और तमाम देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने से निर्मित होता है । भारत की विदेश नीति में अब तक मुख्य रूप से तीन या चार देशों को बता दी जाती थी हलाकि लुक ईस्ट पॉलिसी भारत अफ्रीकी यूनियन संबंध तमाम प्रयास बहुत पहले से किए जा रहे हैं लेकिन विदेश नीति के मूल में अमेरिका रूस ब्रिटेन जापान ब्राजील चीन अगर इससे थोड़ा आगे बढ़ता था तो दक्षिण अफ्रीका मुख्य रूप से शामिल था तेल राजनीति के अंतर्गत सऊदी अरब इराक ईरान संयुक्त अरब अमीरात तक के साथ थोड़े बहुत राजनीतिक संबंध स्थापित किए जाते हैं हलाकि वैश्विक मंच पर पाकिस्तान और चीन को छोड़कर भारत किसी भी देश के साथ कोई विशेष मतभेद नहीं था लेकिन विदेश नीति इतनी शक्ति भी नहीं थी हम वर्तमान का एक उदाहरण है तो देखते हैं सिक्किम के मुद्दे पर चीन कि मीडिया द्वारा युद्ध जैसे हालात बताए गए जिसमें भारत के समर्थन में रूस अमेरिका जापान इराक अफगानिस्तान इजराइल भूटान नेपाल श्रीलंका बेल्जियम ताइवान जैसे तमाम देश आंकड़े के इसी बीच जर्मनी में चल रहे हैं जी-20 देशों के सम्मेलन में भी भारत का पक्ष मजबूत रहा वर्तमान में भारत में जो अपनी विदेश नीति में सबसे बड़ा परिवर्तन किया है वह अपने समकक्ष अपने से निम्न स्थिति वाले देशों को अपने साथ लेकर चल रहा है तथा अपने से उच्च स्थिति वाले देश हैं के साथ बराबर का संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रहा है प्रधानमंत्री का अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस कनाडा रूस इसराइल या फिर अभी हाल का जर्मनी दौरा हो हर जगह हर बार भारत में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज की है वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को फ्रांस मे हुऐ जलवायु समझौते से अलग कर लिया जिसमें 195 देश शामिल है , अमेरिका के हटने के पश्चात एक नेतृत्व कर्ता का स्थान रिक्त हुआ है जिसके लिऐ भारत चीन फ्रांस रूस के लिऐ अवसर के रूप मे देखा जा रहा है ।
भारत की वर्तमान विदेश अब पुरानी विदेश नीति से बहुत अलग होकर भारत को अनुसरण करने वाले देश की श्रेणी हटाकर नेतृत्वकर्ता के रुप मे प्रस्तुत किया है ।
जय हिन्द
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