आखिर इनको क्या बोलें !!!!!

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इजराइल की राजकीय यात्रा पर है जिसको लेकर पूरे विश्व में तरह तरह की बयान बाजी हो रही है विश्व के तमाम देशों में जिस तरह की बयानबाजी हो रही है उसके लिए हम को अन्य देशों के नेताओं के जनप्रतिनिधियों के या संस्थाओं के आतंकी संगठनों के या पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के नेताओं का या प्रतिष्ठित लोगों का बयान सुनने की अपेक्षा भारत के नेताओं या प्रतिष्ठित लोगों का बयान सुन लिया जाए तो पूरे विश्व के नेताओं का बयान का मिला-जुला स्वरूप मिल जाएगा।
     प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे से गाजा पट्टी के लोग इतने ज्यादा परेशान नहीं है जितने भारत के विपक्षी दलों के नेता चाहे वो प्रकाश करात बिंदास वृंदा करात है या फिर मुख्य विपक्षी दल जो कि संसद में मान्यता प्राप्त विपक्षी दल नहीं है कांग्रेस या फिर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव इस श्रृंखला में आप ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल को भी रख सकते हैं इन नेताओं का बयान कुछ इस तरह आ रहा है जैसे भारतीय जनता पार्टी इसराइल के साथ इजराइल के साथ तथा अंय विपक्षी दल को गाजा पट्टी में खड़ा कर दिया गया हो तथा प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के साथ मिलकर मिलकर विपक्षी दलों पर भारी गोलाबारी कर रहे हो भारत की आजादी के बाद से नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैंजो इस़राइल के राजकीय दौरे पर गये है ।प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई मायनों मे महत्वपूर्ण तथा भारत की विदेशनीति में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है अब तक भारत के जितने नेता इजरायल की यात्रा पर गए वह गाजा पट्टी मतलब फलस्तीन की यात्रा पर भी गए हैं और इन दोनों देशों की यात्रा एक साथ करते हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी केवल इजरायल की यात्रा पर गए हैं जो भारतीय विदेश नीति में आए परिवर्तन को परिलक्षित करता है अब भारत वैश्विक मंच पर अपने हितों के अनुरूप खुलकर खेलने को तैयार है मेरा मानना है संपूर्ण विश्व मैं जो भी संबंध बनते वह उनकी न्यू मैं कहीं ना कहीं स्वार्थ छिपा होता है बिना अपने हित के कोई देश किसी दूसरे देश के साथ संबंध नहीं बनाता है अगर भारत इजराइल के साथ अपने हितों को पा रहा है तो फिर उसके साथ संबंध बनाने में क्या दिक्कत है लेकिन भारत का कुछ राजनीतिक दल तथा कुछ तथाकथित बुद्धिमान लोग प्रधानमंत्री के इस कदम की आलोचना करते हैं तथा इससे एक विशेष समुदाय के लोगों के हितों के खिलाफ मानते हैं अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि अगर भारत का इजरायल के साथ दोस्ताना संबंध है तो क्या भारत में रहने वाले जो भारतीय नागरिक हैं उनको इजराइल किसी प्रकार का नुकसान पहुंचा सकता है जोकि कभी संभव नहीं है फिर इजराइल से कैसा डर अगर भौगोलिक स्थिति भी देखी जाए तो इजरायल भारत का निकटतम पड़ोसी की बात तो दूर दूर का भी पड़ोसी नहीं है और भारत की सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इजराइल एक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है अगर पिछले को समझो तो को देखें  तोइस़राइल भारत के साथ मिलकर सैन्य सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी तथा अस्त्र सस्त्रों के निर्माण का इच्छुक है सीमा निगरानी प्रणाली अवाक्स जो भारत को इजराइल के द्वारा प्राप्त हुआ जिसे अमेरिका तथा भारत का पुराना सहयोगी रूस भी उस तरह की प्रणाली को भारत को देने में असमर्थता जताई थी इसराइल के पास हमारे सहन हितों की पूर्ति करने वाला बहुत से अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट तोप मिसाइल प्रणाली मौजूद है जिसे इजराइल भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान के साथ तकनीकी साझा करके भारत में ही बनाने को इच्छुक है फिर ऐसे में हमें इजराइल के साथ संबंध बनाने में क्या दिक्कत हो सकती है ।
लेकिन कुछ नेता राजनीतिक कारणों से स्वार्थवश इस संबंध को भारत की एकता के लिए खतरा बताकर इसकी आलोचना कर रहे हैं अभी अभी विदेश से छुट्टी मनाकर लौटे युवराज राहुल गांधी का बयान आया जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतिहास का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री बताया अब इस तथ्य को उन्होने कहां से लाया यह बात वास्तव में शोध का विषय क्योंकि हमारे पिछले प्रधानमंत्री डॉक्टर सिंह से भी कमजोर कोई प्रधानमंत्री हो सकता है जिसके के निर्णय को उन्ही के पार्टी का एक सांसद कूड़ा बताकर फाड़कर फेंक देता है मैं दागी विधायक और सांसदों को बचाने वाले अध्यादेश की बात कर रहा हूं जिसे डॉक्टर सिंह सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के ख़िलाफ़ लाया था और व्यापक विरोध होने के बाद उन्हीं के पार्टी के सांसद राहुल गांधी ने इस अध्यादेश को फाड़कर कूड़ेदान में फेंकने की बात की जो सरासर सरकार की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने वाला कदम था मुझे नहीं लगता की वर्तमान प्रधानमंत्री के निर्णय के ख़िलाफ़ कोई ऐसा कदम उठा सकता है इसलिए श्री गाधी का यह समझ से परेहै ।
   अब मै भारत के कुछ राजनेताओं की समक्ष की बात करता हूँ तथा उनके प्रलापों की चर्चा.भी करता हूँ।
सर्वप्रथम हम मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे पर जो विचार हैं उसकी चर्चा करते हैं उनका मानना है कि भारत का प्रधानमंत्री का इजराइल दौरा भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा है इससे अल्पसंख्यक समुदाय का हित खतरे में पड़ गया है ज्ञातव्य हो अल्पसंख्यकों में वह विशेष रुप से मुस्लिम अल्पसंख्यकों की बात कर रहे हैं इनका विचार इस तथ्य पर आधारित है की फलस्तीन समेत इसराइल के जितने भी पड़ोसी देश हैं सब मुस्लिम देश हैं और उनका इजराइल के साथ जो संबंध है वह कहीं से भी अच्छा नहीं है अगर इसी तथ्य को हम भारत के संदर्भ में रखें तो भारत का जो सबसे बड़ा दुश्मन देश माना जाता है वह पाकिस्तान है क्योंकि भारत में आतंक और कश्मीर दोनों समस्या का जड़ पाकिस्तान है वैसे तो पाकिस्तान में कुछ खास होता नहीं है लेकिन वह आतंक के निर्यात करने में अव्वल है भारत का पड़ोसी पाकिस्तान मुस्लिम देश है और भारत का इस देश के साथ शुरू से ही युद्ध का संबंध रहा है कभी भी शांतिपूर्ण संबंध नहीं रहे तो इसका मतलब यह तो नहीं जो देश भारत के साथ संबंध बनाता है वह मुस्लिम विरोधी हैं इस प्रकार विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया जाना सर्वथा निराधार है रही बात भारत में रहने वाले अल्पसंख्यकों की तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत की है अगर इसराइल गाजा पट्टी में बमबारी करता है तो मेरे समझ में नहीं आता कि उस बमबारी से कहां से भारत का कोई अल्पसंख्यक घायल होता है ।
   इसी तरह के बिचार प्रकाश करात तथा वृंदा करात का भी है इनका भी यही मानना है की भारत अगर इजराइल के साथ संबंध बनाता है तो उससे भारत में रहने वाले मुसलमानों के हितों की अनदेखी होगी अब यह बात समझ से परे है भारत के मुसलमानों का हित भारत में है या फिर फलीस्तीन में हमने इसी तरह का विचार पाकिस्तानी नायिका वीना मलिक का भी सुना उनका भी यही मानना है की भारत के संबंध से भारतीय मुसलमानों के हितों की अनदेखी होगी मैं वीना मलिक से यही कहना चाहूंगा कि आप पहले पाकिस्तानी मुस्लिमों के हितों की बात करें फिर भारत पर ध्यान दे तो ज्यादा अच्छा है जो विचार नवाज शरीफ के हैं उसी तरह से मिलता-जुलता विचार ममता बनर्जी लालू प्रसाद यादव के भी हैं पाकिस्तानी मीडिया में लगातार प्रधानमंत्री मोदी को इसराइल के साथ संबंध बनाकर मुस्लिम  पर आक्रांता के रूप में दर्शाने कोशिश किया जा रहा है कि भारत मुसलमानों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है यही विचार भारत के कुछ राजनीतिक दल जिसमें कांग्रेस प्रमुख है एकता है अब यह बात समझ से परे है कि भारत में रहने वाले मुसलमानों का हित भारत इजराइल संबंध से कहां प्रभावित हो रहा है हां मैं यह मानता हूं युवराज राहुल गांधी के नानी का घर इटली में जरूर है लेकिन भारतीय मुसलमानों के नानी का घर फलीस्तीन या गाजा पट्टी में नहीं है तो इस हिसाब से भी इनका हित नहीं प्रभावित हो रहा है रही बात हित की अगर भारत विकास करेगा उन्नति करेगा तो वह अपने नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएगा बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराएगा आतंकी हमलों में केवल हिंदू नहीं मारे जाते इसमें मुस्लिम भी मारे जाते हैं भारत की सीमा सुरक्षा को अगर नुकसान पहुंचता है तो उससे प्रभावित मुस्लिम भी होंगे भारत की सीमाओं की अगर चर्चा करें तो सबसे खतरनाक सीमा जम्मू-कश्मीर की मानी जाती है जो पाकिस्तान से सटी है इस सीमा पर जम्मू कश्मीर पंजाब राजस्थान और गुजरात का क्षेत्र पड़ता है जो कश्मीर पंजाब और राजस्थान है इन क्षेत्रों में सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम बाहुल्य है अगर पाकिस्तान की तरफ से कोई आक्रमण होता है तो सबसे पहले प्रभावित मुस्लिम होगा ना कि पाकिस्तान मुस्लिमों पर आक्रमण नहीं करेगा वह उन पर भी आक्रमण करेगा और उन्हें प्रभावित करेगा दूसरी सीमा जो भारत के सिर का दर्द है वह पूर्वोत्तर है जो चीन से लगी हुयी चाइना भी प्रतिदिन भारत की सीमा पर कुछ ना कुछ गतिविधियां करता रहता है यह सीमा पूर्वोत्तर की सिक्किम अरुणांचल सीमावर्ती क्षेत्र जो चीन से लगते हैं वह भी मुस्लिम बाहुल्य है ऐसे में चीन का जो प्रथम आक्रमण होगा उससे भी मुस्लिम ही प्रभावित होंगे अगर बांग्लादेश की तरफ से कुछ गतिविधि होती है तो उससे भी प्रभावित होने वाला पश्चिम बंगाल असम का क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है इस तरह अगर हम इजराइल के सहयोग से अपनी सीमा सुरक्षा को बढ़ा रहे हैं अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ा रहे हैं तथा अपने यहां उत्तम कोट की तकनीकी का विकास कर रहे हैं तो उससे किस प्रकार मुस्लिम प्रभावित हो जाएगा यह समझ से परे है बल्कि सीमा सुरक्षित होने पर जो सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हैं वह और ज्यादा सुरक्षित होंगी तथा अपने हितों की पूर्ति कर सकेंगे कश्मीर से यह समाचार आए दिन मिलता है कि पाकिस्तानी गोलीबारी में सीमावर्ती लोग घायल हुई पलायन किए उनको भारी नुकसान हुआ आखिर कौन से लोग हैं यह सब को ज्ञात है की सीमा पर मुस्लिम लोगों का बाहुल्य है तो सीधी सी बात है कि उससे प्रभावित होने वाले लोग मुस्लिम ही है अगर भारतीय सीमा सुरक्षित होती है तो इसमें मुस्लिमों का हित है यह यह निर्णय स्पष्ट है कि इससे राष्ट्र का हित राष्ट्र के हित में ही राष्ट्र में रहने वाले सभी लोगों का हित है ।
    भारत के राजनीतिक दल आज तक मामा शकुनि और मामा माहिल की राजनीति मे तथा जयचंद बनकर अपने तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति करने में लगे है । अगर प्रधानमंत्री के इस़राइल दौरे का बिरोध हो रहा है तो उसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि विपक्षी दल वोट बैंक की लालच में खुद मुसलमानो का हितुआ दिखाना चाहते है वे यह प्रदर्शित करना चाहते है कि वे न केवल भारत के मुसलमानों के साथ खड़े है वल्कि वे विश्व के अन्य मुस्लिम के साथ है । लेकिन वे यह भूल जाते है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने को लेकर ना कि गाजा पट्टी पर हमला करने के लिए इसराइल की यात्रा से पहले प्रधानमंत्री सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात ईरान पाकिस्तान तुर्की अफगानिस्तान बांग्लादेश जैसे तमाम मुस्लिम देशों की यात्रा कर चुके हैं तो  केवल केवल इजरायल की यात्रा करने से कहां से मुस्लिमों का अहित हो रहा है हमारे राजनीतिक दल यह भूल जाते हैं की भारत के हित में ही भारत में रहने वाले नागरिकों का हित है जम्मू कश्मीर की जो आज समस्या बनी हुई है पत्थरबाजी से लेकर आतंकवाद तक उसकी जड़ में भारत की स्वार्थपरक राजनीति है भारत के राजनीतिक दल याकूब मेमन अफजल करो तथा कश्मीर में मारे जाने वाले आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं तथा भारतीय सेना पर बलात्कारी होने तक का आरोप लगा रहे हैं जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है उत्तर प्रदेश में इससे पहली पंचवर्षीय कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान महोदय का कुछ इसी तरह का वेतन बयान था वह सेना को शोषक के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान में जाकर पाकिस्तानी मीडिया से कहते हैं मोदी को हटाओ आखिर पाकिस्तान में कहां से इतनी हिम्मत आ गई क्यों भारत के प्रधानमंत्री को हटाए हटा सकता है लेकिन यह विपक्ष की मनोदशा को दर्शाता है कि वह किस तरह से सत्ता के लालच में वोट बैंक बनाने के लिए देश के अंदर ही देश को खोखला करता है अगर कोई कश्मीर में पत्थरबाजी का समर्थन कर रहा है तो सीधी सी बात है वह भारत के खिलाफ है अगर जो बयान नवाज शरीफ का है भारत की आंतरिक स्थिति को लेकर वही भारत के किसी राजनेता का है तो सीधी सी बात है कि वह भारत के खिलाफ है जो बयान पाकिस्तानी आतंकी सरगना का है वही बयान अगर भारतीय नेता का है अगर भारत में अफजल गुरु याकूब मेमन के समर्थन में नारे लगाए जाते हैं तो जो यह नारा लगा रहा है अस्पष्ट है कि वह राष्ट्रद्रोही है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का तात्पर्य कहीं से या नहीं होता कि आप राष्ट्र के खिलाफ प्रलाप करें जो व्यक्ति के नाम पर विश्व में खुद को दादा घोषित किया चाहे अमेरिका हो चाहे विट्रेन हो वहां के किसी विश्वविद्यालय में जिस तरह भारत के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत विरोधी नारे लगते हैं उसी तरह वहां पर ब्रिटेन या अमेरिका विरोधी नारे लगा दिए जाएं तो मैं मान लूं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है  लेकिन इस तरह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग केवल भारत में होती है क्योंकि भारत में राष्ट्र कि नहीं स्वार्थ की राजनीति हो रही है ।
   अब आप ही बताये आखिर इस तरह कि राजनीति करने वाले को क्या कहा जाऐ ??
  
    जय हिन्द

Comments