एक बेल्ट एक सड़क
वैश्विक परिदृश्य मे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के अंतर्गत चीन प्राचीन कालीन रेशम मार्ग को फिर से एक बेल्ट एक सड़क परियोजना के अंतर्गत चालू करना चाहता है ज्ञातव्य हो प्राचीन कालीन रेशम मार्ग लगभग 6500 किलोमीटर लंबा था जो मध्य एशिया यूरोप अफ्रीका दक्षिण एशिया से होकर गुजरता था जिसमें चीन भारत रूस ईरान मित्र प्रमुख मार्ग का नाम रेशम मार्ग इसलिए पड़ा की भारतीय व्यापारी चीन से रेशम खरीद कर इस मार्ग से लाते थे तथा वस्त्र निर्माण करके इसी मार्क से अन्य देशों में भेजते थे रेशम का व्यापार विश्व में इसी माह से होता था अतः प्राचीन काल में इसे सिल्क रोड या रेशम मार्ग कहा जाता था
क्या है एक बेल्ट एक सड़क परियोजना - एक बेल्ट एक सड़क परियोजना वास्तव में यह चीन की उपज है इससे एशिया अफ्रीका तथा यूरोप के देशों को जोड़ा जाएगा यह परियोजना रेलवे व सड़क मार्ग से जुड़ेगी इस परियोजना में विश्व भर के लगभग 68 देश शामिल होंगे विश्व की लगभग 4.4 अरब आबादी शामिल होगी इस मार्ग पर शामिल देशों की जीडीपी विश्व की जीडीपी का 40% है यह परियोजना अगर देखा जाए तो विश्व के व्यापार को एक गति प्रदान करने वाली होगी क्योंकि अभी तक विश्व का लगभग 90% व्यापार समुद्री मार्ग से होता है जिसमें समय भी अधिक लगता है और असुरक्षा भी रहती है हलाकि इस परियोजना का विभिन्न कारणों से विरोध भी हो रहा है क्योंकि चीन इस परियोजना के माध्यम से कुछ देशों की संप्रभुता पर तथा उनके आंतरिक मामलों में 2 देशों की विवादित मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है चीन का दावा है इस परियोजना में 68 देशों से होकर सड़क गुजरेगी लेकिन अभी हाल में ही है एक बेल्ट एक सड़क परियोजना के सम्मेलन में केवल 29 देशों ने भाग लिया जिसमें भारत अनुपस्थित रहा/
भारत के विरोध का कारण - भारत चीन की इस परियोजना का विवाह विरोध अपने आंतरिक मामलों तथा सीमा विवाद के मामलों के चलते कर रहा है चिंकी यह परियोजना चीन से पाकिस्तान से होती हुई पुराने सिल्क मार्ग पर गुजरेगी जो भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र है पीओके गिलगित बाल्टिस्तान से होकर यह मार्ग जाएगा जो भारत का क्षेत्र है इसलिए भारत इसका विरोध कर रहा है क्योंकि चीन उस विवादित क्षेत्र को पाकिस्तान का मान कर निर्माण कर रहा है करेगा जो भारत की संप्रभुता पर हमला है हालांकि अगर यह परियोजना वास्तव में धरातल पर आ जाए तो भारत के लिए भी फायदेमंद होगी क्योंकि यह मार्ग बिना भारत से होकर गुजरे अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकता वर्तमान में भारत विश्व की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एक आकर्षक स्थल है साथ ही साथ भारत के अन्य पड़ोसी देश भूटान नेपाल म्यांमार भारत के साथ हैं बांग्लादेश भी इस परियोजना का विरोध कर रहा है अतः चीन के सामने यह एक प्रमुख समस्या है लेकिन अगर यह मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं जाता तो चीन भारत और पाकिस्तान के विवाद क्षेत्र से अफ्रीका तक जाने वाली इस परियोजना का क्रियान्वनयन कर सकेगा ।
भारत द्वारा एक बेल्ट एक सड़क का जबाब-- भारत की कूटनीति का स्तर पर चीन की इस परियोजना का अपनी तरह से ट्राई लेटरल हाईवे प्रोजेक्ट के माध्यम से दे रहा है भारत ईस्ट एशिया पालिसी के अंतर्गत म्यामार बांग्लादेश ईरान मद्धेशिया भूटान अन्य देशों को एक सड़क से जोड़ने की परियोजना है भारत चीन के पड़ोसी देश भारत बांग्लादेश व्यापार थाईलैंड बेल्जियम वियतनाम तक मार्ग का विस्तार तथा दूसरी तरफ भारत अफगानिस्तान के मार्ग से ईरान के चाबहार बंदरगाह तथा मद्धेशिया तक सड़क मार्ग निर्माण की योजना है अगर भारत इस योजना का क्रियान्वयन करता है तो वह बिना चीन और पाकिस्तान गए विश्व के एशिया अफ्रीका तथा यूरोप महाद्वीप तक अपनी पकड़ बना सकता है लेकिन अगर भारत और चीन इस समस्या का समाधान करके एक साथ परियोजना का विकास करें तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा उत्तम होगा।
चीन विश्वसनीय नही - भारत सहित विश्व के ऐसे देश जो विकसित नहीं है या जिनकी अर्थव्यवस्था अभी छोटी है वह चीन पर विश्वास नहीं रखते क्योंकि चीन सबको साथ ना लेकर अपने लाभ को प्रमुखता देता है इसलिए चीन के एक बेल्ट एक सड़क पर पढ़ने वाले देश चीन की इस परियोजना को लेकर उतने विश्वस्त नहीं है चीन अपनी सेना की पहुंच बनाने के लिए भारत के चारों तरफ मोतियों की माला परियोजना को आकार दे चुका है जिसके चलते इस मार्क का प्रयोग चीन सैन्य बल के लिए करें इसको भी लेकर शामिल देश सशंकित हैं और उनकी आशंका निर्मूल भी नहीं क्योंकि चीन की सेना का गश्त चाहे दक्षिण चीन सागर हो हिंद महासागर या फिर पाकिस्तान हर जगह तक मौजूद है इसलिए शामिल देश इसे चीन की सैन्य महत्वकांक्षा के रूप में भी देखते हैं चीन पर बेल्जियम वियतनाम जापान भारत मंगोलिया कजाखस्तान रूस के साथ गहरे सीमा विवाद है जो भी उसकी विश्वसनीयता पर शंका पैदा करते हैं चीन का अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद है तथा चीन उत्तर कोरिया और पाकिस्तान जैसे खतरनाक आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त देशों को संरक्षण प्रदान कर रहा है जो उस पर गहरी शंका पैदा करते हैं ।
एक बेल्ट एक सड़क का लाभ - चीन की यह परियोजना अगर वास्तविक धरातल पर उतर आती है तो विश्व की अर्थव्यवस्था में क्रांति होगी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में लगने वाले समय में लगभग 40% की कमी आएगी तथा माल ढुलाई में होने वाले खर्च में लगभग 45 से 50% तक की कमी आएगी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा भी बढ़ेगी इतना ही नहीं पर्यटन में भी क्रांति आएगी क्योंकि सड़क और रेल मार्ग से जुड़े होने के कारण एक देश के नागरिक कम खर्चे में दूसरे देश में जा सकते हैं अतः पर्यटन के लिए भी लाभकारी है यह परियोजना वैश्विक व्यापार के लिए तथा अर्थव्यवस्था के लिए एक मील के पत्थर के सदृश्य है परंतु इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन पर भी संशय है क्योंकि उदाहरण के तौर पर अगर सड़क मार्ग से या रेल मार्ग से चीन अपने सामान को सुदूर भेज रहा है तो व्यापक सुरक्षा प्रबंध करने होंगे अन्यथा सामान की लूट का खतरा समुद्री व्यापार से लगभग 8 से 10 गुना ज्यादा बढ़ जाएगा इतना ही नहीं इस मार्ग पर कुछ ऐसे भी देश हैं जो आतंकी गतिविधियों में सम्मिलित हैं जिसे पाकिस्तान जहां सुरक्षा की गारंटी नहीं ले जा सकती ऐसे में सामान की सुरक्षा के लिए मेरी याद करता देश को अपनी सेना भी भेजनी होगी जो सुरक्षा कर सके अगर किसी परिस्थिति बस किसी देश में निर्यातक सुरक्षा बल और वहां के नागरिकों में संघर्ष होता है तो परियोजना का उद्देश्य वही विफल हो जाएगा परंतु ऐसी स्थितियां बहुत कम बनेंगे फिर भी सुरक्षा को लेकर संशय हमेशा बरकरार रहेगा ।
अंततः चीन की उपज एक बेल्ट एक सड़क परियोजना जहां वैश्विक व्यापार में प्रांत के रूप में देखी जा रही है वही तमाम गहरे प्रश्न जी उठ रहे हैं या परियोजना अभी केवल कागज पर तैयार हो रही है हलाकि इसका प्रयोग चीन कुछ देशों के मध्य रेल मार्ग निर्माण करती कर चुका है परंतु इतनी बड़ी परियोजना के लिए एक सजग खाता तैयार करना होगा तथा किसी भी विवाद से बचना होगा नहीं तो परियोजना की सफलता पर हमेशा शंका रहेगा और कई अरबो डालर की परियोजना एक ही झटके में तैयार हो जाने के बाद असफल हो जाएगी अतः मार्ग में पड़ने वाले सभी देशों सीमावर्ती क्षेत्रों पर दोनों देशों के मध्य समन्वय के बाद ही यह परियोजना सफल हो सकती है लेकिन इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में क्रान्ति अवश्य माना जाएगा।
Comments
Post a Comment