सूखा

भारत में सूखा प्रभावित क्षेत्र
विभिन्न भूगोलवेत्ता ओने सूखा की अलग अलग परिभाषा दी है अगर भारत की जलवायु के संदर्भ में देखा जाता है तो 22 दिनों तक 0.25 सेंटीमीटर से कम वर्षा रिकॉर्ड की जाती है तो सूखा की स्थिति माने जाए परंतु यह परिभाषा सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त नहीं है मेघालय के पठार विशेषकर चेरापूंजी में और मशीन राम यदि 15 दिन में 0.25 CM वर्षा ना रिकार्ड की जाए तो सूखे की परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है सूखे की स्थिति भारत में मानसून फेल हो जाने के कारण उत्पन्न होती है 1982 ,1998 ,2009 स्वतंत्रता के बाद इन वर्षों में भारत सर्वाधिक सूखा पीड़ित रहा जब अलनीनो सफल होता है तो भारत का मानसून विफल हो जाता है सामान्यतः प्रत्येक 5 वर्षों में 2 वर्ष सूखे जैसी स्थिति वाले होते हैं
1 राजस्थान के मरुस्थली तथा अर्ध मरुस्थली क्षेत्र अरावली पर्वत के पश्चिम में थार का मरुस्थल पहला है राजस्थान के मरुस्थल युग निकटवर्ती अर्ध मरुस्थली भागों में जो औसत वार्षिक वर्षा है वह 15 से 60 सेंटीमीटर है यहां वर्षा की विविधता 20 से 60% से अधिक है फलस्वरूप यह भारत का सबसे अधिक सूखाग्रस्त क्षेत्र है
2 पश्चिम घाट का पूर्वी वर्षा विचित्र क्षेत्र में आंध्र प्रदेश महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के उत्तरी पश्चिमी भाग प्रमुख है यहां औसत वार्षिक वर्षा 60 सेंटीमीटर से कम और वर्षा की विविधता 30% से अधिक है यहां भी प्रा या सूखे की स्थिति रहती है
3 अन्य सूखाग्रस्त क्षेत्रों में उड़ीसा का कालाहांडी पश्चिम बंगाल का पुरुलिया बांकुरा जिले उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड मध्य प्रदेश का बघेलखंड जम्मू और कश्मीर का लद्दाख क्षेत्र तमिल तमिल नाडु का मदुरई इत्यादि जिले मानसून की धोखेबाजी के कारण सुखा का शिकार होते हैं भारत में सूखे के कारण अनेक बार अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती
सूखा प्रवंधन
  . भारत सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है तथा ऐसे क्षेत्रों के लिए बहुत सी राहत योजना तैयार की है 1987 से पहले सूखाग्रस्त क्षेत्र वासियों को अनाज चारे की सहायता तथा रोजगार प्रदान किया जाता था इस प्रकार की योजनाओं का भारत सरकार पर भारी वित्ती दबाव पड़ता है 1987 के पश्चात भारत सरकार ने ऐसे क्षेत्रों के चौमुखी विकास की योजना तैयार की है भारत सरकार वर्तमान में सूखाग्रस्त क्षेत्रों के उत्थान के लिए प्रत्येक बूंदी से अत्याधिक पैदावार को लक्ष्य बनाकर सिंचाई योजना सोलर पंप नहर सिंचाई नदी जोड़ो परियोजना आदि पर जोर दिया है भारत सरकार मनरेगा के अंतर्गत ऐसे क्षेत्रों में तालाब खुदाई कराकर जल संग्रह की भी उचित व्यवस्था की है हालांकि अभी भी सूखाग्रस्त क्षेत्रों की समस्या का समाधान के लिए उचित उपाय नहीं हो पाए हैं इस समस्या के स्थाई समाधान का हल तथा बाढ़ की समस्या के स्थाई समाधान का है दोनों एक ही है भारत का एक क्षेत्र एक ही समय में बाढ़ से ग्रसित हो जाता है तथा दूसरा क्षेत्र सूखा से ग्रस्त होकर लगातार पीड़ित रहता है ऐसी स्थिति में नदी जोड़ो परियोजना ही एकमात्र उपाय के रुप में सामने आती है इसके अंतर्गत बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों की नदियों का पानी नहरों के माध्यम से सूखाग्रस्त क्षेत्रों की नदियों तक लाया जाएगा तथा जिन क्षेत्रों में नदियां नहीं है वहां पर नहरों का जाल बिछाया जाएगा जिससे बाढ़ की समस्या का समाधान भी होगा तथा सुखा की समस्या का भी समाधान हो जाएगा हांलाकि इस परियोजना को लेकर कुछ विद्वानों ने चिंताएं भी जाहिर की है उनका मानना है यह परियोजना बहुत अधिक खर्चीली है यह अवश्य है किसी धरातल में लाइन धरातल पर लाने में अनेक जटिल समस्याओं का सामना करना होगा लेकिन एक बार यह परियोजना पूरी हो जाने के पश्चात इसका सारा खर्च सूखाग्रस्त और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जो राहत कार्य बचाव कार्य कृषि नुकसान वाणिज्य नुकसान तथा अन्य चल अचल संपत्तियों का नुकसान उन सभी को बचाया जा सकेगा तथा जलमार्ग का विकास भी होगा भारत सरकार का लक्ष्य आंतरिक जलमार्ग का विकास करना है क्योंकि या कम खर्चीला और सहज है साथ ही साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी यह काफी उपयोगी है क्योंकि जो
नहरों का जाल बिछाया जाएगा नहरों के दोनों तरफ वृक्ष लगाकर पर्यावरण में भी योगदान किया जा सकता है अतः इस समस्या का सबसे स्थाई समाधान यही है।

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