GST

Goods and service tax
अर्थात
वस्तु एंव सेवा कर
आज मध्य रात्री से भारत मे भी वस्तु एंव सेवा कर लागू कर दिया गया , अब भारत उन देशों के प्रतिष्ठित वर्ग में शामिल हो गया जो अपने यहाँ जी.एस.टी जैसी आधुनिकतम् और उन्नत कर प्रणाली लागू किया है । यहाँ जो सबसे बड़ी बात गौर करने वाली है जी.एस.टी विधेयक भारत का सबसे विवादित तथा एक मैराथन चर्चा के बाद पारित हुआ , इस विधेयक को लागू करने मे एक प्रचण्ड बहुमत की सरकार को तीन वर्ष से अधिक का समय लग गया ।
   जी.एस.टी लागू करने और उसके दर का निर्धारण करना भारत जैसे देश में जहाँ अक्सर राजनीतिक हित राष्ट्रहित पर भारी पड़ जाता है एक बहुत ही मुश्किल भरा कार्य था ।
     जी.एस.टी परिषद ने अपनी श्रीनगर मे हुई बैठक मे कर की दर -5%, 12% , 18% , 28% मे विभाजित किया । जिससे कुछ वस्तुओं की कीमत में कमी आ रही है तो कुछ वस्तुओं की कीमत मे इजाफा होगा --
    इसका हम एक सामान्य सा उदाहरण ले कोयले का तो कोयले पर पुराना कर दर 11.4३% था साथ ही साथ राज्य पारागमन कर भी लगता था लेकिन अब केवल 5% का जी.एस.टी लगेगा । वही  एक उदाहरण एस. यू. वी. कार का ले तो पहले इस पर कर 25% तथा 18% उपकर लगाकर कुल 43% कर लिया जाता था लेकिन अब कर की दर 28% तथा उपकर 18% कुल 46% कर लिया जायेगा , तो जहाँ एक तरफ दैनिक उपयोग की वस्तुऐं सस्ती हो रही है वही विलासिता की वस्तुऐं महगी हो रही है ।
   वही कुछ लोगो ने जी.एस.टी को लेकर कुछ अफवाह तथा निराधार भय एंव भ्रम का माहौल बना रखा है , - जिसक एक सामान्य उदाहरण है कि जी.एस.टी मे अरहर की दाल पर 5% कर लगेगा जीससे दाल सस्ती होगी , अब दाल उत्पादक किसानों को यह बताया जा रहा कि जी.एस.टी. दाल सस्ती हो गयी अब आपकी दाल सस्ते दाम पर बिकेगी तथा किसानों को नुकसान होगा लेकिन यहाँ पर यह समझने की जरूरत है कि दाल क्यों सस्ती हो रही है इसको एक उदाहरण से समझा जा सकता है - पहले किसान से अरहर या दाल 100 रू किलो खरीदा गया तथा उसपर 9.50% कर राज्य पारागमन शुल्क तथा अन्य कर मिलाकर लगभग 14% तक लगता था जिससे दाल की कीमत बड़कर 114 ₹/किलो हो जाती थी लेकिन जी.एस.टी की वर्तमान कर व्यवस्था के बाद किसान से ₹100/किलो खरीदा गया उसपर केवल 5% जी.एस.टी तथा .50% का उपकर जिसके बाद कुल कीमत हो जाऐगी 105.50₹ अतः दाल की कीमत मे ₹8.50 की कमी आऐगी और किसान को कोई नुकसान नही होगा वल्कि किसान के पास ₹8.50 दाम बड़ाने का अवसर भी बड़ गया और उपभोक्ता पर अतिरिक्त भार भी नही आऐगा।
     इस विधेयक को लेकर सबसे ज्यादा विवाद व्यापारी वर्ग को लेकर है , व्यापारी वर्ग लगातार यह तर्क दे रहा है कि जी.एस.टी से वस्तु की कीमत बड़ेगी और इसका बिरोध कुछ सीमित व्यापारी कर भी रहे , इसके विरोध के पीछे राजनीतिक कारण भी सम्भाव्य है क्योकि सामान का दाम बड़ने या घटने का व्यापारी वर्ग पर प्रभाव न पड़कर उपभोक्ता पर पड़ता है ।
   व्यापारी वर्ग के बिरोध के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है , पहले व्यापारी उलझे हुऐ कर संजाल का लाभ का उठाकर कर की हेराफेरी करके उपभोक्ता से कर तो वसूलते है लेकिन सरकार तक कर पहुचने में बहुत अधिक लाभ कमाते थे , पुरानी कर व्यवस्था मे प्रत्येक स्तर पर कर लगता था जिससे हर स्तर पर कर चोरी होती थी तथा सरकार व उपभोक्ता दोनो को नुकसान होता था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में केवल एक स्तर पर कर लगेगा जिससे कर चोरी पर पूर्ण नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है तथा आयकर का आकलन तथा वसूली मे पारदर्शिता आयेगी , जिससे कर चोरी पर लगाम लगेगी और इसी वजह कुछ लोग जो कर चोरी करते थे उनके लिऐ समस्या हो गयी ।
     इस विधेयक के सन्दर्भ मे लोग अन्य देशों का उदाहरण देते है कि भारत मे उनकी अपेक्षा अधिक कर लगाया गया है जी.एस.टी मे लेकिन वो यह भूल जाते है कि भारत सामाजिक क्षेत्र पर सड़क से लेकर शौचालय तथा गर्भवती महिला के प्रसव तथा शिक्षा स्वास्थ्य अन्य जिम्मेदारी का वहन सरकार करती है भारत ऐसा करने वाला दुनिया प्रमुख देश है इसलिऐ यहाँ कर की दर वाजिब है ।
जय हिन्द

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